Saturday, September 22, 2018

क्या इंसानियत जिन्दा है

क्यूँ उठ रहा है संस्कार और इंसानियत का जनाजा 

आखिर क्यूँ इंसान भूलते जा रहा है अपने बुजुर्गों के दिए संस्कार, आखिर क्यूँ इंसान - इंसान का दुश्मन बनता जा रहा है. कहीं न कहीं सवाल तो उठता है उस भीड़ पर और हर उस इंसान पर जो इंसान को इंसान नहीं समझता और बिना कुछ सोचे समझे किसी को भी अपना शिकार बना लेता है, यहाँ सवाल पुरे समाज पर उठता है जो लोग आज इंसानों को सिर्फ अपने हाँथ की एक कठपुतली समझते हैं .क्या मानवता धीरे-धीरे  खत्म होती जा रही है ,क्या इंसान का इंसान के प्रति प्रेम खत्म होता जा रहा है या हम खुद खत्म करते जा रहे हैं ? क्यूँ कोई किसी इंसान को अपना नहीं समझता है आज ! क्यूँ नहीं सोचता की वो भी किसी परिवार का बाप है किसी की माँ है किसी का बेटा है और किसी बहन का भाई है आखिर क्यूँ नहीं सोचता की वो भी किसी परिवार की बेटी , माँ और बहु है , हर इंसान को अपने परिवार का हिस्सा समझने की जरुरत है आज जब आप ये सोचना शुरू कर देंगे की अगर ये मेरे किसी परिवार के सदस्य के साथ होता तो मुझ पर क्या बीतती , नजरिया तो बदलना होगा , सोच तो बदलनी होगी . क्यूँ नहीं याद हैं हमें आज अपने माँ बाबूजी और बुजुर्गों के द्वारा दिए गए संस्कार उन्होंने कब सिखाया था हमें की किसी से लड़ो , किसी को मारो, कब सिखाया की दूसरों की बहन बेटियों पर बुरी नजर रखो ,कब सिखाया की किसी महिला का सम्मान मत करो , आज देखने में तो यह आता है की लोगों को कार की जरूरत ज्यादा  है संस्कार की जरुरत नहीं है आज लगता तो ऐसा है की लोग संस्कारों को तो खुटी पर टांग चुके हैं, क्या लोगों का लोगों के प्रति सम्मान मर चुका है .
क्या इंसान का जन्म इंसानियत खत्म करने के लिए होता है या इंसानियत बनाये रखने के लिए . सिर्फ इंसान ही घरों में पैदा नहीं होते इंसानियत भी उन्ही के साथ पैदा होती है. इसलिए अच्छे काम करें ,अच्छी सोच रखें समाज में रह रहे सभी लोगों के प्रति ,खुश रहें और खुश रखें 

क्या इंसानियत जिन्दा है

क्यूँ उठ रहा है संस्कार और इंसानियत का जनाजा  आखिर क्यूँ इंसान भूलते जा रहा है अपने बुजुर्गों के दिए संस्कार, आखिर क्यूँ इंसान - इंसान क...